आरामदायक जीवन आपको क्यों कमजोर बना रहा है
आरामदायक जीवन आपको क्यों कमजोर बना रहा है
आज की ज़िंदगी पहले से कहीं ज़्यादा आरामदायक है।
सब कुछ आसान है, तेज़ है, तुरंत उपलब्ध है।
फिर भी लोग भीतर से
थके हुए, उलझे हुए और असंतुष्ट हैं।
यह विरोधाभास नहीं है।
यह एक संकेत है।
1. आराम ने संघर्ष की क्षमता कम कर दी है
जब जीवन में सब कुछ आसान हो जाता है,
तो इंसान मुश्किल सहने की आदत खो देता है।
थोड़ी सी असुविधा
तुरंत भारी लगने लगती है।
पर विकास हमेशा
असुविधा के पार होता है।
2. आराम आपको सुस्त नहीं, निर्भर बनाता है
आराम का असली नुकसान
आलस नहीं है।
वह आपको
सिस्टम, लोगों और परिस्थितियों पर
निर्भर बना देता है।
और निर्भरता के साथ
आत्म-विश्वास धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
3. बिना चुनौती, आत्म-सम्मान नहीं बनता
आत्म-सम्मान तारीफ से नहीं,
खुद को पार करने से बनता है।
जब जीवन में
कोई चुनौती नहीं होती,
तो भीतर यह सवाल उठता है—
“मैं किस लायक हूँ?”
4. आराम आपको वर्तमान में बाँध देता है
आराम आपको
जो है, उसी में रोक लेता है।
विकास के लिए
थोड़ा असंतोष ज़रूरी होता है।
जो इंसान
हमेशा आराम में रहता है,
वह भविष्य के लिए
संघर्ष करना भूल जाता है।
5. असुविधा ही चरित्र बनाती है
अनुशासन
धैर्य
साहस
ये सब
आराम से नहीं आते।
ये असुविधा से आते हैं।
वही असुविधा
जो आप अक्सर टाल देते हैं।
समाधान क्या है?
आपको आराम छोड़ने की ज़रूरत नहीं है।
आपको आराम की लत छोड़ने की ज़रूरत है।
रोज़ थोड़ा सा
कठिन चुनिए।
वही कठिनाई
आपको अंदर से
मजबूत बनाएगी।
याद रखिए—
सुविधा सुख देती है,
लेकिन असुविधा शक्ति देती है।
