सब कुछ क्षणभंगुर है

“जो आज है, वह कल नहीं रहेगा।”

यही इस सृष्टि का अटल सत्य है।

फिर भी मनुष्य उसी वस्तु को अपना मान बैठता है, जो एक दिन उससे छिन जाने वाली है। धन पर गर्व करता है, यौवन पर अभिमान करता है, पद के पीछे भागता है, संबंधों को अपनी संपत्ति समझता है और जब समय उन्हें अपने साथ ले जाता है, तब दुःख, क्रोध और निराशा में डूब जाता है।

वास्तव में दुःख वस्तुओं के नष्ट होने से नहीं होता, दुःख इस भ्रम से होता है कि वे सदैव हमारे साथ रहेंगी।


ऋतु का संदेश

क्या आपने कभी वृक्ष को देखा है?

वसंत आता है तो वही वृक्ष नव-पल्लवों से भर जाता है। चारों ओर हरियाली छा जाती है।

कुछ समय बाद ग्रीष्म आता है। पत्तियाँ मुरझाने लगती हैं।

फिर वर्षा आती है। वृक्ष पुनः जीवन से भर उठता है।

शरद और शीत के आगमन पर वही वृक्ष सूना दिखाई देता है।

किन्तु क्या वृक्ष कभी विलाप करता है?

नहीं।

उसे ज्ञात है कि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है।

यदि वृक्ष परिवर्तन को स्वीकार कर सकता है, तो मनुष्य क्यों नहीं?


बालक और मिट्टी का महल

समुद्र के तट पर एक बालक मिट्टी का सुंदर महल बना रहा था।

वह पूरे मन से उसे सजा रहा था।

कुछ ही क्षणों में समुद्र की एक लहर आई और महल को अपने साथ बहा ले गई।

दूर खड़ा एक वृद्ध सोच रहा था कि अब बालक अवश्य रोएगा।

परन्तु बालक मुस्कुराया, फिर बैठा और नया महल बनाने लगा।

वृद्ध ने पूछा,

“तुम्हें दुःख नहीं हुआ?”

बालक ने सहज भाव से उत्तर दिया,

“दुःख किस बात का? मुझे तो पहले से ही ज्ञात था कि यह मिट्टी का महल है, पत्थर का नहीं।”

मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यही है कि वह मिट्टी के महलों को शाश्वत समझ बैठता है।


संस्कृत का अमूल्य संदेश

“अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम्।”
— श्रीमद्भगवद्गीता

अर्थ : यह संसार अनित्य है। यहाँ मिलने वाला सुख भी स्थायी नहीं है। इसलिए उस सत्य की ओर बढ़ो जो कभी नष्ट नहीं होता।

एक अन्य श्लोक कहता है—

“जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।”
— श्रीमद्भगवद्गीता

अर्थ : जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है, और मृत्यु के पश्चात पुनः जन्म भी निश्चित है।

जब परिवर्तन निश्चित है, तब अहंकार किस बात का?


दीपक की लौ

एक दीपक पूरी रात जलता है।

वह यह सोचकर प्रकाश देना बंद नहीं करता कि प्रातः होते ही बुझ जाना है।

वह अपना कर्तव्य निभाता है।

सूर्य भी प्रतिदिन अस्त होता है।

किन्तु अगली भोर फिर उदित हो जाता है।

नदी निरंतर बहती रहती है।

उसे यह चिंता नहीं होती कि अंततः समुद्र में मिल जाना है।

प्रकृति का प्रत्येक अंश हमें यही शिक्षा देता है—

जीवन का मूल्य उसकी अवधि में नहीं, उसके उद्देश्य में है।


समय से बड़ा कोई नहीं

समय ने राजाओं को साधारण बना दिया।

समय ने निर्धनों को सम्मान दिलाया।

समय ने महलों को खंडहर बनाया।

समय ने आँसुओं को मुस्कान में बदल दिया।

और समय ने मुस्कानों को आँसुओं में भी बदलते देखा।

इसीलिए कहा गया है—

“कालः सर्वं भक्षयति।”

अर्थ : समय सब कुछ अपने भीतर समेट लेता है।


फिर मनुष्य क्यों उलझा है?

यदि धन स्थायी नहीं…

यदि यश स्थायी नहीं…

यदि सौंदर्य स्थायी नहीं…

यदि शरीर स्थायी नहीं…

यदि संबंध भी समय के साथ बदल जाते हैं…

तो फिर मनुष्य किस बात पर इतना गर्व करता है?

क्यों ईर्ष्या करता है?

क्यों दूसरों से द्वेष रखता है?

क्यों अपने ही मन को अशांत करता है?


जीवन का वास्तविक धन

यदि कुछ संजोना ही है, तो ऐसे गुण संजोइए जिन्हें समय भी नष्ट नहीं कर सकता।

करुणा संजोइए।

सत्य संजोइए।

विनम्रता संजोइए।

सेवा संजोइए।

सदाचार संजोइए।

ज्ञान संजोइए।

यही वह धन है जो मनुष्य को मृत्यु के बाद भी लोगों के हृदयों में जीवित रखता है।


अंतिम विचार

आज जो पीड़ा आपको असहनीय लग रही है, संभव है कुछ वर्षों बाद वही केवल एक स्मृति रह जाए।

आज जो सफलता आपको अत्यंत बड़ी प्रतीत हो रही है, समय उसे भी साधारण बना देगा।

इसलिए न दुःख में टूटिए, न सुख में फूलिए।

परिवर्तन को स्वीकार कीजिए।

वर्तमान को प्रेम से जीइए।

सद्कर्म करते रहिए।

 

और स्मरण रखिए—

“यह संसार एक सराय है, स्थायी निवास नहीं।
यहाँ सब यात्री हैं, कोई भी सदा के लिए नहीं ठहरता।”

 

जब सब कुछ क्षणभंगुर है, तब अभिमान व्यर्थ है।
जब सब कुछ क्षणभंगुर है, तब भय भी व्यर्थ है।

 


और जब सब कुछ क्षणभंगुर है, तब प्रत्येक क्षण को प्रेम, करुणा और सदाचार के साथ जीना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।

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Bhupenddra Singh Raathore (Also Known As Coach BSR) is an entrepreneur, Amazon bestselling author, philanthropist, and life & business strategist. Bhupenddra Singh Raathore is a towering name in the field of training, known for creating miraculous breakthroughs in the lives of people and businesses simultaneously. For more than a decade, millions of people have enjoyed the warmth, humor, and transformational power of Coach BSR’s business and personal development events. Coach BSR is the author of two Amazon bestsellers, including the recent groundbreaking book on 15 Days Public Speaking. CoachBSR has transformed more than 50 lac lives around the world through his live seminars, educational videos, and Online Training.

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